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रत्न चिकित्सा

ज्योतिष में माणिक्य सूर्य ग्रह का परिचायक है तथा औषध रूप में क्षय, पक्षाघात, हर्निया, उदर-शूल, घाव और विष प्रभाव आदि के उपचार में काम आता है।

ज्योतिष में मोती चंद्रमा ग्रह का परिचायक है औषध रूप में मोती हृदय रोग, मूच्र्छा, मिरगी, उन्माद, पथरी, ज्वर, उदर रोग तथा जीवन रक्षा के उपचार में काम आता है।

ज्योतिष में मूंगा मंगल ग्रह का परिचायक है। यह भूत-प्रेत, तूफान, बिजली, छाया-माया आदि बाधाओं के प्रभाव को नष्ट करने में विशेष काम आता है।

ज्योतिष में पन्ना बुध ग्रह का परिचायक है। यह ज्वर, सन्निपात, दमा, मिरगी, पागलपन, आंत्रशोथ, नजर आदि के उपचार में काम आता है।

ज्योतिष में पुखराज गुरु ग्रह का परिचायक है। पुखराज विष-विरोधी है। तथा धन-यश-आयु वृद्धि में काम आता है।  

ज्योतिष में हीरा शुक्र ग्रह का परिचायक है। तथा औषध रूप में यह धातु दौर्बल्य को दूर करता है।

ज्योतिष में नीलम शनि ग्रह का परिचायक है। यह भाग्य वृद्धि के लिए तथा आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचने के लिए धारण किया जाता है।

ज्योतिष में गोमेद राहु ग्रह का परिचायक है। औषध रूप में यह गरमी, तिल्ली, बवासीर, पांडु, नकसीर, ज्वर, दुर्घटना, त्वचा रोग आदि में काम आता है।   

ज्योतिष में लहसुनिया केतु ग्रह का परिचायक है। यह शत्रु-भय आदि का नाश कर वंश-वृद्धि करता है। औषध रूप में मधुमेह, उपदंश, नामर्दी और पाचन विकारों में लाभप्रद है।


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