30 मई 2022
आजीविका-कारक
दशम भाव को कर्म भाव की संज्ञा दी जाती है । इसके स्वामी को दशमेश या कर्मेश कहा जाता है। दशम भाव से ही व्यक्ति की आजीविका का विचार किया जाता है। ज्योतिष के अनुसा…
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30 मई 2022
दशम भाव को कर्म भाव की संज्ञा दी जाती है । इसके स्वामी को दशमेश या कर्मेश कहा जाता है। दशम भाव से ही व्यक्ति की आजीविका का विचार किया जाता है। ज्योतिष के अनुसा…
पूरा पढ़ें9 मई 2022
पञ्च गव्य पंचामृत पञ्च पल्लव पञ्च रत्न गौ मूत्र गो धृत बड का पत्ता सोना गो गोबर गो दधि गूलर का पत्ता चांदी गो दूध गो दूध पीपल का पत्ता तांबा गो धृत गंगाजल आम क…
पूरा पढ़ें7 मई 2022
महीनो के नाम सूर्य देवी देवता चैत्रमास वेदांग रमा विष्णुदेवता वैशाख भानु मोहनी मधुसूधन ज्येष्ठ इंद्र पद्माक्षी त्रिवित्रम आषाढ़ रवि कमला वामन श्रावण गबस्ती कान…
पूरा पढ़ें7 मई 2022
संक्रांति के पहले और बाद 6 घंटे 24 मिनट का समय (16 घड़ी) पुण्य काल माना जाता है। आधी रात पूर्व संक्रांति हो तो दिन के तीसरे भाग में पुण्य काल माना जाता है। आधी…
पूरा पढ़ें7 मई 2022
हिन्दू वर्ष में छ: ऋतु होती हें जैसे – वसन्त, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमन्त और शिशिर ऋतु , मास और संक्रांति आदि का ज्ञान नीचे कोष्टक से हो सकता हें | ऋतु हिन्दी…
पूरा पढ़ें4 मई 2022
मनुष्य के जीवन में गृह निर्माण का विशेष महत्त्व होता है, अतः अत्यन्त सावधानी के साथ गृह निर्माण कराना चाहिये। स्थान-चयन ��ृह-निर्माण के लिये प्रथम स्थान का चयन…
पूरा पढ़ें4 मई 2022
मनुष्य के जीवन में गृह निर्माण का विशेष महत्त्व होता है, अतः अत्यन्त सावधानी के साथ गृह निर्माण कराना चाहिये। दिशा-निर्धारण गृह-निर्माण के लिये दिशा-निर्धारण ए…
पूरा पढ़ें30 अप्रैल 2022
मनुष्य के चन्द्रमा के नवांश के अनुसार होता है। लग्ननवांश के अनुसार शरीर की आकृति होती है और चन्द्रमा जिस नवांश में होता है, उसके अधिपति के अनुसार जातक का रंग ह…
पूरा पढ़ें19 अप्रैल 2022
ज्योतिष विज्ञान और चिकित्सा विज्ञान का सम्बन्ध प्राचीन काल से रहा है । पूर्वकाल में एक सुयोग्य चिकित्सक के लिये ज्योतिष विषय का ज्ञाता होना अनिवार्य था । इससे…
पूरा पढ़ें19 अप्रैल 2022
ज्योतिष विज्ञान और चिकित्सा विज्ञान का सम्बन्ध प्राचीन काल से रहा है । पूर्वकाल में एक सुयोग्य चिकित्सक के लिये ज्योतिष विषय का ज्ञाता होना अनिवार्य था । इससे…
पूरा पढ़ें18 अप्रैल 2022
सामुद्रिक शास्त्र भारत की बहुत प्राचीन विद्या है। सामुद्रिक शास्त्र का अध्ययन क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है, इसमें शरीर लक्षणों के साथ ही हस्त विज्ञान का भी अध्ययन…
पूरा पढ़ें18 अप्रैल 2022
प्रायः समस्त भारतीय विज्ञान का लक्ष्य एक मात्र अपनी आत्मा का विकास कर उसे परमात्मा में मिला देना है । विज्ञान का ध्येय विश्व की गूढ़ पहेली को सुलझाना है । ज्यो…
पूरा पढ़ें30 मार्च 2022
विवाह के पूर्व वर कन्या की जम्मपत्रिया मिलाने को मेलापक कहते है। ज्योतिष में लग्न को शरीर और चन्द्रमा को मन माना गया है। प्रेम मन से होता है, शरीर से नहीं । इस…
पूरा पढ़ें28 मार्च 2022
'अवश्यमेव भोक्तव्यं कृतं कर्म शुभाशुभम्' वैदिक दर्शन की पुनर्जन्म की अवधारणा के अनुसार मनुष्य निरन्तर शुभ-अशुभ कर्मों में निरत रहता है। उसे कर्मों का फल अवश्य…
पूरा पढ़ें28 मार्च 2022
कालगणनाक्रम .1 1 परमाणु = काल की सूक्ष्मतम अवस्था 2 परमाणु = 1 अणु 3 अणु = 1 त्रसरेणु 3 त्रसरेणु = 1 त्रुटि 10 त्रुटि = 11 प्राण 10 प्राण = 1 वेध 3 वेध = 1 लव…
पूरा पढ़ें28 मार्च 2022
'ज्योतिषां सूर्यादिग्रहाणां बोधकं शास्त्रम्' ज्योतिष-शास्त्र की इस व्युत्पत्ति के अनुसार सूर्यादि ग्रह और काल का बोध कराने वाले शास्त्र को ज्योतिषशास्त्र कहते…
पूरा पढ़ें23 मार्च 2022
चान्द्रमासों के नाम नक्षत्रों के नाम पर रखे गये है। पूर्णिमा को जो नक्षत्र होता है,उस नक्षत्र के नाम पर मास का नाम रखा गया है चन्द्रमा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को…
पूरा पढ़ें21 मार्च 2022
कल्प पाँच प्रकार के माने गये हैं- नक्षत्रकल्प वेदकल्प संहिताकल्प आङ्गिरसकल्प शान्तिकल्प नक्षत्रकल्प में नक्षत्रों के स्वामी का विस्तारपूर्वक यथार्थ वर्णन किया…
पूरा पढ़ें21 मार्च 2022
तिथिवारं च नक्षत्रं योगः करणमेव च । यत्रैतत्पञ्चकं स्पष्टं पञ्चाङ्गं तन्निगद्यते ॥ जानाति काले पञ्चाङ्गं तस्य पापं न विद्यते । तिथेस्तु श्रियमाप्नोति वारादायुष…
पूरा पढ़ें21 मार्च 2022
प्राचीन काल के ऋषि-मुनियों के पास आज की तरह न तो विकसित वेधशालाएँ थीं और न सूक्ष्म परिणाम देने वाले आधुनिकतम वैज्ञानिक उपकरण, फिर भी वे अपने अनुभव तथा अतीन्द्र…
पूरा पढ़ें21 मार्च 2022
मनुष्य के आज भी समस्त कार्य ज्योतिष के द्वारा ही चलते हैं । व्यवहार के लिये अत्यन्त उपयोगी दिन, सप्ताह, पक्ष, मास, अयन, ऋतु, वर्ष एवं उत्सव, तिथि आदि का परिज्ञ…
पूरा पढ़ें21 मार्च 2022
गणित, होरा एवं संहिता - इन तीन स्कन्धों से युक्त ज्योतिष शास्त्र वेद का नेत्र प्रधान अंग है । इस विद्या से भूत, भविष्य, वर्तमान, सभी वस्तुओं तथा त्रिलोक का प्र…
पूरा पढ़ें21 मार्च 2022
मानव जीवन के सुख-दुःख सभी शुभाशुभ विषयों का विवेचन करने वाला विभाग होरा शास्त्र है । इसमें इष्टकाल के द्वारा विविध कुण्डलियों का निर्माण कर जातक के पूर्वजन्म,…
पूरा पढ़ें21 मार्च 2022
संहिता में सिद्धान्त और फलित दोनों के विषयों का मिश्रण है । गणित एवं फलित के मिश्रित रूप को अथवा ज्योतिष शास्त्र के सभी पक्षों पर जिसमें विचार किया जाता है, उस…
पूरा पढ़ें21 मार्च 2022
काल की लघुत्तम इकाई से प्रलयान्त काल तक की कालगणना की हो, कालमानों के सौर-सावन-नाक्षत्र चान्द्र आदि भेदों का निरुपण किया हो, ग्रहों की मार्गी-वक्री, शीघ्र-मन्द…
पूरा पढ़ें21 मार्च 2022
महर्षि पाणिनि ने ज्योतिष को वेदपुरुष का नेत्र कहा है - 'ज्योतिषामयनं चक्षुः'। जैसे मनुष्य बिना नेत्र के किसी भी वस्तु का दर्शन करने में असमर्थ होता है, ठीक वैस…
पूरा पढ़ें17 मार्च 2022
ज्योतिष में रत्नों की विशेष महिमा है। रत्नों की चमत्कारी शक्ति का सम्बन्ध आकाशीय ग्रहों से है।प्रत्येक ग्रह में प्राकृतिक गुण होते हैं। ग्रह विशेष और रत्नविशेष…
पूरा पढ़ें17 मार्च 2022
जन्म के साथ ही मानव को स्वरोदय-ज्ञान मिला है। यह विशुद्ध वैज्ञानिक आध्यात्मिक ज्ञान-दर्शन है, प्राण ऊर्जा है, विवेक शक्ति है। स्वर-साधना अनुभव से हमारे ऋषि-मुन…
पूरा पढ़ें17 मार्च 2022
जन्मपत्री पूर्वार्जित कर्मों को जानने का माध्यम है । पूर्वकृत कर्म से मनुष्य को कौन-सी व्याधि होगी? इसका ज्ञान ज्योतिष विद्या से ही प्राप्त होता है । भारतीय सं…
पूरा पढ़ें17 मार्च 2022
विभिन्न मन्वन्तरों में धर्म और मर्यादा की रक्षा के लिये तथा अपने सदाचरण से उत्तम शिक्षा प्रदान करने के लिये सात ऋषि उत्पन्न (अवतरित) होते हैं । ये ही सप्तर्षि…
पूरा पढ़ें9 फ़रवरी 2022
स्वप्न परम पिता परमात्मा की एक विशेष रचना है। सनातन धर्म के धार्मिक ग्रंथो में मनुष्य शरीर की चार अवस्थाये बताई गयी हैं। जागृत निद्रा स्वप्न तुरीय सपना विषय मन…
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