शुभ मुहूर्त

मुहूर्त का अर्थ है किसी कार्य के आरम्भ के लिए उपयुक्त समय। वैदिक परम्परा में यह मान्यता है कि कार्य के प्रारम्भ के समय की ग्रह-स्थिति उस कार्य के फल को प्रभावित करती है, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरम्भ अथवा किसी भी संस्कार से पूर्व मुहूर्त का विचार किया जाता है।

मुहूर्त निकालने का आधार पंचांग है। नीचे उसके मूल सिद्धान्त दिए गए हैं — किन्तु ध्यान रहे कि पंचांग की शुभ तिथियाँ सबके लिए एक समान होती हैं। आपके लिए उनमें से कौन-सी सर्वाधिक अनुकूल है, यह आपकी जन्म कुण्डली देखकर ही निश्चित होता है।

पंचांग के पाँच अंग

मुहूर्त का निर्धारण पंचांग के इन पाँच अंगों के आधार पर होता है:

वर्ज्य काल — किन समयों से बचा जाता है

रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) तथा अमावस्या सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए त्याज्य मानी जाती हैं।

भद्रा (विष्टि करण) में मांगलिक कार्य वर्जित हैं। इसी प्रकार राहुकाल, यमगण्ड और गुलिक काल को भी प्रमुख कार्यों के आरम्भ के लिए छोड़ा जाता है।

चातुर्मास में विवाह और गृह प्रवेश जैसे कार्य नहीं किए जाते। गुरु अथवा शुक्र के अस्त होने पर भी मांगलिक कार्य स्थगित रखे जाते हैं।

अभिजित मुहूर्त

दिन के मध्य में, स्थानीय सूर्य के ठीक ऊपर आने के आसपास की लगभग अड़तालीस मिनट की अवधि अभिजित मुहूर्त कहलाती है। इसे प्रायः सर्वसिद्ध माना गया है और जब कोई विशेष मुहूर्त उपलब्ध न हो तब इसका आश्रय लिया जाता है।

अपवाद यह है कि बुधवार को अभिजित का त्याग किया जाता है, और दक्षिण दिशा की यात्रा के लिए भी इसे अनुकूल नहीं माना जाता।

कार्य के अनुसार भिन्न विचार

प्रत्येक कार्य के लिए नियम समान नहीं हैं। विवाह में गुरु-शुक्र की स्थिति और वर-वधू का तारा-बल प्रमुख है; गृह प्रवेश में स्थिर लग्न और स्थिर नक्षत्र; व्यापार आरम्भ में बुध और लाभ भाव की स्थिति देखी जाती है।

इसीलिए "शुभ मुहूर्त" कोई एक सूची नहीं है — वह कार्य, कर्ता और काल तीनों के संयोग से निकलता है।

सामान्य प्रश्न

क्या पंचांग देखकर स्वयं मुहूर्त निकाला जा सकता है?
पंचांग से सामान्य शुभ तिथियाँ ज्ञात हो जाती हैं और वह सबके लिए समान होती हैं। आपकी कुण्डली, तारा-बल और चल रही दशा देखकर ही यह तय होता है कि उपलब्ध तिथियों में से कौन-सी आपके लिए सर्वाधिक अनुकूल है।
अभिजित मुहूर्त कब होता है?
दिन के मध्य में, स्थानीय मध्याह्न के आसपास लगभग अड़तालीस मिनट की अवधि। यह स्थान और तिथि के अनुसार बदलता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से देखना आवश्यक है।
क्या राहुकाल में कोई कार्य नहीं किया जा सकता?
राहुकाल में नए और महत्वपूर्ण कार्यों का आरम्भ टाला जाता है। पहले से चल रहे कार्य अथवा नित्य कर्म इससे प्रभावित नहीं माने जाते।
यदि शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो तो?
ऐसी स्थिति में अभिजित मुहूर्त अथवा उपलब्ध विकल्पों में सबसे कम दोष वाले समय का चयन किया जाता है, और आवश्यकता होने पर उपाय बताए जाते हैं।

विशिष्ट मुहूर्तों पर विस्तृत लेख

अपने कार्य के लिए मुहूर्त निकलवाइए

विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरम्भ अथवा किसी भी संस्कार के लिए — आपकी कुण्डली देखकर उपयुक्त दिन और समय बताया जा सकता है।

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शुभ मुहूर्त — तिथि, वार, नक्षत्र और योग का विचार | Tarush Astro