ज्योतिष ब्लॉग

पञ्चपर्व

1 मिनट पढ़ें

पर्वाण्येतानि राजेन्द्र रविसंक्रांतिरेव च ॥
स्त्रीतैलमांसभोगी च पर्वस्वेतेषु वै पुमान् ।
विण्मूत्रभोजनं नाम प्रयाति नरकं ध्रुवम् ॥ 

विष्णुपुराण के अनुसार पञ्चपर्व-

1 चतुर्दशी

2  अष्टमी

3 अमावस्या

4  पूर्णिमा

5  रविसंक्रान्तिक

पञ्चपर्व में जो मनुष्य

1 स्त्रीसम्भोग

2  तैलाभ्यङ्ग

3  मांसभोजन

करता है, वह मनुष्य विष्मूत्र भोजन नामक नरक में  वास करता है।

इस लेख से आगे व्यक्तिगत मार्गदर्शन चाहिए?

व्यक्तिगत सलाह और समयबद्ध कदमों के लिए पंडित पवन कुमार शर्मा से परामर्श बुक करें।

परामर्श बुक करें
पञ्चपर्व | Tarush Astro