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पन्द्रह तिथियों का एक पक्ष होता है । जिस पक्ष में चन्द्रमा की कलाओं का बढ़ना आरम्भ होता है, उसे ‘शुक्ल पक्ष’ तथा जिनमें घटना आरम्भ होता है, उसे ‘कृष्णपक्ष’ कहते हैं । शुक्लपक्ष की पन्द्रहवीं तिथि- पूर्णिमा को चन्द्रमा का पूर्ण रूप दिखाई देता है तथा कृष्णपक्ष की  पन्द्रहवीं तिथि-अमावस्या को चन्द्रमा अदृश्य हो जाता है ।

उक्त प्रकार से एक महीने में दो पक्ष होते हैं तथा एक पक्ष 15 दिनों का होता है । परन्तु कभी-कभी तिथियों की क्षय-वृद्धि के कारण एक पक्ष घट कर 13 अथवा 14 दिन का अथवा बढ़कर 16 दिन का भी हो जाता है । यह घटा-बढ़ी चन्द्रमा की गति तथा अन्य कारणों पर निर्भर करती है ।

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