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चन्द्रमा जिस पथ पर पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करता है, तो उस समय मुख्य तारों के समूह के बीच मध्य से चन्द्रमा गुजरता है उसी समूह को नक्षत्र कहते हैं। चन्द्रमा का राशि चक्र नक्षत्रों में विभाजित है। पुराणों के अनुसार 27 नक्षत्र प्राचेतस दक्ष की सत्ताईस बेटियाँ हैं। जिनका विवाह चन्द्रमा से किया गया। रोहिणी उन सब में अधिक सुन्दर थी । चन्द्रमा रोहिणी से प्रेम करता था इस पर बहनों ने पिता दक्ष से चन्द्रमा की शिकायत कर दी। दक्ष ने चन्द्रमा को क्षय रोग होने का श्राप दिया । चन्द्रमा को क्षय हुआ तो घरती रस विहीन हो गयी, जल सूख गया, वृक्ष वनस्पति सूख गये, ओषधियाँ नष्ट होने लगी। देवताओं ने दक्ष से कहा, तब दक्ष ने शापोद्वार किया लेकिन पूरा श्राप दूर नहीं हुआ और चन्द्रमा 15 दिन क्षय को प्राप्त होगा। और 15 दिन कलाओं का विस्तार होगा इस प्रकार 27.3 दिन में (27 दिन 8 घंटे लगभग) चन्द्रमा प्राचेतस दक्ष की बेटियों के पास क्रम से जाता है। चन्द्रमा का प्रारम्भ रोहिनी नक्षत्र से होता है। नक्षत्र भारतीय पंचाग का तीसरा अंग है। जिनका क्षरण नहीं होता वे नक्षत्र होते हैं। नक्षत्र सदैव अपने स्थान पर ही रहते हैं। नक्षत्रों की संख्या 27 है ,मुहूर्त ज्योतिष में ‘अभिजित’ को जोड़कर नक्षत्रों की संख्या 28 मानते हैं ।

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