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कल्प पाँच प्रकार के माने गये हैं-

  1. नक्षत्रकल्प
  2. वेदकल्प
  3. संहिताकल्प
  4. आङ्गिरसकल्प
  5. शान्तिकल्प

  • नक्षत्रकल्प में नक्षत्रों के स्वामी का विस्तारपूर्वक यथार्थ वर्णन किया गया है  ।
  • वेदकल्प में ऋगादि-विधानका विस्तारसे वर्णन है — जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सिद्धि के लिये कहा गया है ।
  • संहिताकल्प में तत्त्वदर्शी मुनियों ने मन्त्रों के ऋषि, छन्द और देवताओं का निर्देश किया है।
  • आङ्गिरस कल्प में स्वयं ब्रह्माजी ने अभिचार-विधि से विस्तारपूर्वक छः कर्मों का वर्णन किया है।
  • शान्तिकल्प में दिव्य, भौम और अन्तरिक्ष-सम्बन्धी उत्पातों की पृथक्-पृथक् शान्ति बतायी गयी है।

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