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गृह-आकार-परिवर्तन

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  • घर के किसी अंश को आगे नहीं बढ़ाना चाहिये। यदि बढ़ाना हो तो सभी दिशाओं में समान रूप से बढ़ाना चाहिये।
  • घर को पूर्व दिशा में बढ़ाने पर मित्रों से वैर होता है।
  • दक्षिण दिशा में बढ़ाने पर मृत्यु का तथा शत्रु का भय होता है।
  • पश्चिम दिशा में बढ़ाने पर धन का नाश होता है।
  • उत्तर दिशा में बढ़ाने पर मानसिक सन्ताप की वृद्धि होती है।
  • आग्नेय दिशा में बढ़ाने पर अग्नि से भय होता है।
  • नैर्ऋत्य दिशा में बढ़ाने पर शिशुओं का नाश होता है।
  • वायव्य दिशा में बढ़ाने पर वात-व्याधि उत्पन्न होती है।
  • ईशान दिशा में बढ़ाने पर अन्न की हानि होती है।

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