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विवाह के पूर्व वर कन्या की जम्मपत्रिया  मिलाने को मेलापक कहते है। ज्योतिष में लग्न को शरीर और चन्द्रमा को मन माना गया है। प्रेम मन से होता है, शरीर से नहीं । इसीलिए  जन्मराशि से मेलापक  का ज्ञान करना चाहिए । भावी दम्पति के स्वभाव, गुण, प्रेम और आचार-व्यवहार के सम्बन्ध में ज्ञात करना है। जब तक समान आचार-व्यवहार वाले वर-कन्या नहीं होते तब तक दाम्पत्य जीवन सुखमय नहीं हो सकता है। जम्मपत्रियों की मेलनपद्धति वर-कन्या के स्वभाव, रूप और गुणों को अभिव्यक्त करती है। ज्योतिष नक्षत्र, योग, ग्रह, राशि आदि, के आधार पर व्यकि का निश्चय करता है। यह बतलाता है कि  नक्षत्र, ग्रह और राशि के प्रभाव से उत्पन्न पुरुष का  नक्षत्र,  ग्रह और राशि के प्रभाव से उत्पन्न नारी के साथ सम्बन्ध करना अनुकूल है। गुण मिलान द्वारा वर और कन्या की प्रजनन शक्ति, स्वास्थ्य, विद्या एवं आर्थिक परिस्थिति का ज्ञान किया जाता है ।  इस गुण मिलान-पद्धति में  वर्ण का एक गुण,  वश्य के दो गुण, तारा के तीन गुण,   योनि के चार गुण,  ग्रहमैत्री के पाच गुण,  गणमैत्री के छह गुण,  भकूट के सात गुण और नाड़ी के आठ गुण मिलाते है।  इस प्रकार कुल 36 गुण होते हैं । इसमें कम से कम 18 गुण मिलने पर विवाह किया जा सकता है, परन्तु नाड़ी और भकूट के गुण अवश्य होने चाहिए । इनके गुण बिना 18 गुणों में विवाह मंगलकारी नहीं माना जाता है ।

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