30 मार्च 2022
विवाह-गुण-मिलान-क्यों
विवाह के पूर्व वर कन्या की जम्मपत्रिया मिलाने को मेलापक कहते है। ज्योतिष में लग्न को शरीर और चन्द्रमा को मन माना गया है। प्रेम मन से होता है, शरीर से नहीं । इस…
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30 मार्च 2022
विवाह के पूर्व वर कन्या की जम्मपत्रिया मिलाने को मेलापक कहते है। ज्योतिष में लग्न को शरीर और चन्द्रमा को मन माना गया है। प्रेम मन से होता है, शरीर से नहीं । इस…
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पित प्रकृति राशि - मेष, सिंह,धनु वायु प्रकृति राशि - वृष, कन्या,मकर मिश्रित प्रकृति राशि - मिथुन, तुला,कुम्भ कफ प्रकृति राशि - कर्क, वृश्चिक,मीन राशियों का स्व…
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1. मेष -सिर 2. वृष -आंखें, चेहरा, गर्दन, मुंह के अन्दर का भाग, 3. मिथुन - भुजाएं, छाती के ऊपर का भाग, कान कंधे। 4. कर्क - हृदय, फेफड़े (छाती के अन्दर का भाग) स…
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सूर्यादिवारे तिथयो भवन्ति मघाविशाखाशिवमूलवह्निः । ब्राह्मचं करोर्काद्यमघण्ट काश्च शुभे विवर्ज्यागमने त्ववश्यम् ॥ रविवार को मघा, सोमवार को विशाखा, मंगलवार को आर…
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नन्दा च भद्रा च जया च रिक्ता पूर्णेति तिथ्योऽशुभमध्यशस्ताः । सितेऽसिते शस्तसमाधमाः स्युः सितज्ञभौमार्किगुरौ च सिद्धाः ॥ नन्दा, भद्रा, जया, रिक्ता, पूर्णा—तिथिय…
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ज्योतिष शास्त्र में विशेष प्रकार से बनने वाले योगों को विशिष्ट राजयोग कहते हैं। ये योग सामान्य योगों से हटकर होते हैं। कलश योग - यदि सभी शुभ ग्रह नवम तथा एकादश…
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मेष - लाल शरीर, कफ प्रकृति, अधिक क्रोधी, कृतघ्न, मंद बुद्धि, स्थिरता-युक्त, स्त्री तथा नौकरों से सदा पराजित वृष - मानसिक रोग, स्वजनों से अपमानित, प्रिय पुरुषों…
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1. मेष- वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल होता है। मंगल मकर राशि में 28 अंश तक उच्च रहता है। मंगल कर्क राशि में 28 अंश तक नीच रहता है। 2. वृष- तुला राशि का स्वामी शु…
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राशियों को चार तत्त्वों में बाँटा गया है। पाँचवा तत्त्व आकाश है, जिस में यह चारों मिलते है। राशियाँ जब लग्न में उदित होती है, तो जातक में राशियों के तत्त्व अनु…
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मेष- इस राशि का आधिपत्य पूर्व दिशा में होता है। यह राशि पुरुषजाति, चरसंज्ञक, अग्नितत्त्व, पित्तप्रकृति, भूमि पर निवास वाली, क्षत्रियवर्ण, अल्पसन्तति, रात्रिबली…
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स्थानबल, दिग्बल, कालबल, नैसगिकबल, चेष्टाबल और दृग्बल ये छह प्रकार के बल हैं । 1. स्थानबल- जो ग्रह उच्च, स्वगृही, मित्रगृही, मूल-त्रिकोणस्थ, स्व-नवांशस्थ अथवा द…
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सूर्य से- पिता, आत्मा, प्रताप, आरोग्यता, आसक्ति और लक्ष्मी का विचार किया जाता है। चन्द्रमा से- मन, बुद्धि, राजा की प्रसन्नता, माता और धन का विचार किया जाता है।…
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सूर्य- पितृ, आत्मा, स्वभाव, आरोग्यता, राज्य, देवालय का कारक होता है। चन्द्र- चन्द्र मन का कारक होता है। मंगल- शक्ति, बल, भूसम्पत्ति, कृषि, धैर्य, छोटा भाई, परा…
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लग्न- लग्न- बालक का जब जन्म हुआ, उस समय पूर्व दिशा में किस राशि का उदयमान था, जिस राशि का समय-काल था, वही जन्म-लग्न है। होरास्कन्ध- मानव जीवन के सुख-दुःख, सभी…
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'अवश्यमेव भोक्तव्यं कृतं कर्म शुभाशुभम्' वैदिक दर्शन की पुनर्जन्म की अवधारणा के अनुसार मनुष्य निरन्तर शुभ-अशुभ कर्मों में निरत रहता है। उसे कर्मों का फल अवश्य…
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कालगणनाक्रम .1 1 परमाणु = काल की सूक्ष्मतम अवस्था 2 परमाणु = 1 अणु 3 अणु = 1 त्रसरेणु 3 त्रसरेणु = 1 त्रुटि 10 त्रुटि = 11 प्राण 10 प्राण = 1 वेध 3 वेध = 1 लव…
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'ज्योतिषां सूर्यादिग्रहाणां बोधकं शास्त्रम्' ज्योतिष-शास्त्र की इस व्युत्पत्ति के अनुसार सूर्यादि ग्रह और काल का बोध कराने वाले शास्त्र को ज्योतिषशास्त्र कहते…
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विष्णु पुराण के अनुसार एक समय देवताओं और दानवों में लंबे समय तक युद्ध चलता रहा। भगवान विष्णु ने दोनों पक्षों से समुद्र मंथन करने के लिए के लिए युद्ध रोकने का आ…
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जिस भूमि पर मनुष्यादि प्राणी निवास करते हैं, उसे वास्तु कहा जाता है। इस के गृह, देव प्रासाद, ग्राम, नगर, आदि अनेक भेद हैं। वास्तु के आविर्भाव के विषय में मत्स्…
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सत्ययुग- सत्ययुग = 4000 देवतावर्ष। सत्ययुग की पूर्व सन्ध्या- 400 देवतावर्ष। सत्ययुग की अन्तिम सन्ध्या- 400 देवतावर्ष। सत्ययुग- 1440000+144000+144000 =1728000 (…
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सप्ताह सूर्यादि सात वारों के क्रमानुसार एक चक्र पूर्ण होने के काल का नाम सप्ताह है। पक्ष पक्ष दो हैं, कृष्णपक्ष तथा शुक्लपक्ष। ये 15-15 तिथियों के होते हैं। कृ…
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भविष्यपुराण के अनुसार मूलमन्त्र, नाम-संकीर्तन मन्त्रों से कमल के मध्य में स्थित तिथियों के स्वामी देवताओं की विविध उपचारों से भक्तिपूर्वक यथाविधि पूजा करनी चाह…
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अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल एवं रेवती नामक छह नक्षत्र गंड मूल नक्���त्र कहलाते हैं। यदि जन्म के समय चंद्रमा गंड मूल नक्षत्र में हो तो27 दिनों के पश्चा…
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तिथि के आधे भाग को 'करण' कहते हैं। ये दो होते हैं पूर्वार्द्ध तथा उत्तरार्द्ध । एक चन्द्रमास में 30 तिथियाँ और 60 करण होते हैं। चन्द्र और सूर्य के भोगांशों के…
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