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व्यावहारिक उत्तरों वाला ज्योतिष ब्लॉग

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21 मार्च 2022

भारतीय वर्षाविज्ञान

प्राचीन काल के ऋषि-मुनियों के पास आज की तरह न तो विकसित वेधशालाएँ थीं और न सूक्ष्म परिणाम देने वाले आधुनिकतम वैज्ञानिक उपकरण, फिर भी वे अपने अनुभव तथा अतीन्द्र…

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21 मार्च 2022

ज्योतिष की उपयोगिता

मनुष्य के आज भी समस्त कार्य ज्योतिष के द्वारा ही चलते हैं । व्यवहार के लिये अत्यन्त उपयोगी दिन, सप्ताह, पक्ष, मास, अयन, ऋतु, वर्ष एवं उत्सव, तिथि आदि का परिज्ञ…

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21 मार्च 2022

ज्योतिषशास्त्र और भगवान् सूर्य

गणित, होरा एवं संहिता - इन तीन स्कन्धों से युक्त ज्योतिष शास्त्र वेद का नेत्र प्रधान अंग है । इस विद्या से भूत, भविष्य, वर्तमान, सभी वस्तुओं तथा त्रिलोक का प्र…

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21 मार्च 2022

होरा

मानव जीवन के सुख-दुःख सभी शुभाशुभ विषयों का विवेचन करने वाला विभाग होरा शास्त्र है । इसमें इष्टकाल के द्वारा विविध कुण्डलियों का निर्माण कर जातक के पूर्वजन्म,…

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21 मार्च 2022

संहिता

संहिता में सिद्धान्त और फलित दोनों के विषयों का मिश्रण है । गणित एवं फलित के मिश्रित रूप को अथवा ज्योतिष शास्त्र के सभी पक्षों पर जिसमें विचार किया जाता है, उस…

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21 मार्च 2022

सिद्धान्त

काल की लघुत्तम इकाई से प्रलयान्त काल तक की कालगणना की हो, कालमानों के सौर-सावन-नाक्षत्र चान्द्र आदि भेदों का निरुपण किया हो, ग्रहों की मार्गी-वक्री, शीघ्र-मन्द…

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21 मार्च 2022

काल

संसार के सभी दृश्य पदार्थ परिवर्तन शील हैं । इसी परिवर्तन के ज्ञान का जो हेतु है, उसी को काल कहते हैं । यह काल अद्वितीय, सर्वव्यापी तथा नित्य है । भूत, भविष्य…

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21 मार्च 2022

ज्योतिष

महर्षि पाणिनि ने ज्योतिष को वेदपुरुष का नेत्र कहा है - 'ज्योतिषामयनं चक्षुः'। जैसे मनुष्य बिना नेत्र के किसी भी वस्तु का दर्शन करने में असमर्थ होता है, ठीक वैस…

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21 मार्च 2022

व्रत

शास्त्रोक्त नियम को ही 'व्रत' कहते हैं, वही 'तप' माना गया है । 'दम' (इन्द्रियसंयम) और 'शम' (मनोनिग्रह) विशेष नियम व्रत के ही अङ्ग हैं । व्रत करने वाले पुरुष को…

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21 मार्च 2022

संस्कार

संस्कार क्यों- चौरासी लाख योनियों में भटकता हुआ प्राणी भगवत्कृपा से तथा अपने पुण्यपुंजों से मनुष्य योनि प्राप्त करता है। मनुष्य शरीर प्राप्त करने पर उसके द्वार…

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17 मार्च 2022

रत्न-विज्ञान

ज्योतिष में रत्नों की विशेष महिमा है। रत्नों की चमत्कारी शक्ति का सम्बन्ध आकाशीय ग्रहों से है।प्रत्येक ग्रह में प्राकृतिक गुण होते हैं। ग्रह विशेष और रत्नविशेष…

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17 मार्च 2022

स्वरविज्ञान और ज्योतिषशास्त्र

जन्म के साथ ही मानव को स्वरोदय-ज्ञान मिला है। यह विशुद्ध वैज्ञानिक आध्यात्मिक ज्ञान-दर्शन है, प्राण ऊर्जा है, विवेक शक्ति है। स्वर-साधना अनुभव से हमारे ऋषि-मुन…

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17 मार्च 2022

ज्योतिष और आयुर्वेद

जन्मपत्री पूर्वार्जित कर्मों को जानने का माध्यम है । पूर्वकृत कर्म से मनुष्य को कौन-सी व्याधि होगी? इसका ज्ञान ज्योतिष विद्या से ही प्राप्त होता है । भारतीय सं…

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17 मार्च 2022

सप्त ऋषि

विभिन्न मन्वन्तरों में धर्म और मर्यादा की रक्षा के लिये तथा अपने सदाचरण से उत्तम शिक्षा प्रदान करने के लिये सात ऋषि उत्पन्न (अवतरित) होते हैं । ये ही सप्तर्षि…

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17 मार्च 2022

भद्रा

भद्रा भगवान् सूर्य की पुत्री हैं । ये सूर्य पत्नी छाया से उत्पन्न हैं और शनैश्चर की बहन हैं । भद्रा का वर्ण काला, रूप भयंकर, केश लम्बे और दाँत बड़े विकराल हैं…

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12 मार्च 2022

श्राद्ध में भक्तिभाव

देवकार्यादपि सदा पितृकार्य विशिष्यते । देवताभ्यो हि पूर्वं पितॄणामाप्यायनं वरम् ॥ (हेमाद्रि में वायु तथा ब्रह्मवैवर्त का वचन) देव कार्य की अपेक्षा पितृकार्य की…

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12 मार्च 2022

नवग्रहों के निमित दान

जब जन्म कुण्डली में या वर्ष-कुण्डली में या ग्रह गोचर आदि में कोई ग्रह खराब स्थिति में हो तो अरिष्ट-निवारण के लिये ग्रहों के निमित्त दान-पुण्य करने की विधि हैं…

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12 मार्च 2022

नवग्रहों के वैदिक मन्त्र

सूर्य ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्य च। हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्॥ चन्द्र ॐ इमं देवा असपत्नः सुवध्वं महते क्षत्राय महते ज्…

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12 मार्च 2022

नवग्रहों का स्वरुप

सूर्य पद्मासनः पद्मकर: पद्मागर्भसमद्युतिः । सप्ताश्वः सप्तरज्जुश्च द्विभुज: स्यात् सदा रविः ॥ सूर्य ग्रहों के राजा हैं। यह कश्यप गोत्र के क्षत्रिय एवं कलिंग दे…

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10 मार्च 2022

कालगणना

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9 फ़रवरी 2022

स्वप्न

स्वप्न परम पिता परमात्मा की एक विशेष रचना है। सनातन धर्म के धार्मिक ग्रंथो में मनुष्य शरीर की चार अवस्थाये बताई गयी हैं। जागृत निद्रा स्वप्न तुरीय सपना विषय मन…

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9 फ़रवरी 2022

योग

योग का अर्थ होता है जोड़ । योग की उत्पत्ति नक्षत्र से होती है। भूकेन्द्रीय दृष्टि से सूर्य + चन्द्रमा की गति का योग एक नक्षत्र भोगकाल 13 अंश 20 कला होता है तब…

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