सामग्री पर जाएं Skip to sidebar Skip to footer

हस्त रेखा के अनुसार रत्न धारण

हथेली में ग्रहों के स्थान को पर्वत कहते हैं । हस्त रेखा स्थानग्रह पर्वतरत्न धारण करेतर्जनी उंगली के नीचेबृहस्पति ग्रह पर्वतपुखराज या सुनहलामध्यमा के नीचेशनि ग्रह पर्वतनीलम या काकानीलीअनामिका के नीचेसूर्य ग्रह पर्वतमाणिक्यकनिष्टका के नीचेबुध ग्रह पर्वतपन्ना या ओनेक्समणिबंध से ऊपर, कनिष्टका के नीचे का क्षेत्रचन्द्र ग्रह पर्वतमोतीमणिबंध के ऊपरी हिस्से मेंकेतु ग्रह पर्वतलहसुनियाअंगूठे के…

और पढ़ें

रत्न-परिचय

1. माणिक्य (Ruby): माणिक्य विश्व का सबसे महंगा रत्न है। यह कठोर, पारदर्शी और चमकदार होता है। इसका वास्तविक रंग लाल है श्रेष्ठ माणिक्य चिकना, पारदर्शी, पानीदार या रक्त की भांति गहरा लाल होता है। हथेली में माणिक्य हल्का गर्म प्रतीत होता है। 2. मोती (Pearl): मोती श्वेत, क्रीम, नीला, काला, हरा, बैंगनी, लाल, गुलाबी,…

और पढ़ें

रत्न चिकित्सा

ज्योतिष में माणिक्य सूर्य ग्रह का परिचायक है तथा औषध रूप में क्षय, पक्षाघात, हर्निया, उदर-शूल, घाव और विष प्रभाव आदि के उपचार में काम आता है। ज्योतिष में मोती चंद्रमा ग्रह का परिचायक है औषध रूप में मोती हृदय रोग, मूच्र्छा, मिरगी, उन्माद, पथरी, ज्वर, उदर रोग तथा जीवन रक्षा के उपचार में काम…

और पढ़ें

रुद्राक्ष परिचय

एकमुखी रुद्राक्ष एक मुखी रुद्राक्ष को साक्षात् रूप से महादेव का अवतार माना गया हैं। दो मुख रुद्राक्ष दो मुखी रुद्राक्ष को पार्वती-शिव का अवतार माना गया हैं। तीन मुखी रुद्राक्ष तीन मुखी रुद्राक्ष को अग्नि का रूप माना गया हैं। चार मुखी रुद्राक्ष चार मुखी रुद्राक्ष को पितामह ब्रह्मा का…

और पढ़ें

मोती के गुण

मोती तारे की तरह चमकदार होता है। उसमें परछाई दिखती है। बिना खरोंच वाला होता है। गाय का मूत्र किसी मिट्टी के पात्र में लेकर रातभर उसमें मोती डाल दे। यदि सुबह मोती साबुत मिले तो उत्तम मोती होता है। काँच के बर्तन में मोती डालने पर उसकी किरणें निकलती दिखाई दे तो उत्तम मोती…

और पढ़ें

विरोधी-रत्न

दो परस्पर प्रतिकूल रत्न धारण करने से व्यक्ति को अशुभ फल प्राप्त होता है। 1 माणिक्य के साथ नीलम, लहसुनिया तथा गोमेद नहीं पहनना चाहिये। 2 मोती के साथ-हीरा, पन्ना, नीलम, लहसुनिया तथा गोमेद नहीं पहनना चाहिये। 3 मूंगा के साथ-हीरा, पन्ना, लहसुनिया तथा गोमेद नहीं पहनना चाहिये। 4 पन्ना के साथ मोती और मूंगा नहीं…

और पढ़ें

उत्पत्ति-अनुसार-रत्न-भेद

1. वानस्पतिक रत्न : यह विशेष वृक्षों की जड़ व तने से प्राप्त होते है।  जैसे - कहरूवा, अश्मीभूत आदि ।  2. पाषाण रत्न : चट्टानों, शिलाखण्डों, खानों तथा नदियों से प्राप्त रत्न पाषाण रत्न कहलाते हैं।  जैसे - हीरा, नीलम, माणिक्य, अकीक आदि ।  3. जैविक रत्न :  जलीय जीवों…

और पढ़ें

hi_INHI