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नवग्रहों के वैदिक मन्त्र

सूर्य ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्य च। हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्॥ चन्द्र ॐ इमं देवा असपत्नः सुवध्वं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय। इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश एष वोऽमी सोमोऽस्माकं ब्राह्मणाना राजा॥ मंगल ॐ अग्निर्मूर्धा दिवः ककुत्पतिः पृथिव्या अयम्। अपा गुंग रेता गुंग सि जिन्वति॥ बुध ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते स गुंग…

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नवग्रहों का स्वरुप

सूर्य पद्मासनः पद्मकर: पद्मागर्भसमद्युतिः । सप्ताश्वः सप्तरज्जुश्च द्विभुज: स्यात् सदा रविः ॥ सूर्य ग्रहों के राजा हैं। यह कश्यप गोत्र के क्षत्रिय एवं कलिंग देश के स्वामी हैं। जपाकुसुम के समान इनका रक्तवर्ण है। दोनों हाथों में कमल लिये हुए हैं, सिन्दूर के समान वस्त्र, आभूषण और माला धारण किये हुए हैं।ये जगमगाते हुए हीरे के…

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स्वप्न

स्वप्न परम पिता परमात्मा की एक विशेष रचना है। सनातन धर्म के धार्मिक ग्रंथो में मनुष्य शरीर की चार अवस्थाये बताई गयी हैं। जागृत निद्रा  स्वप्न तुरीय सपना विषय मनुष्य की तीसरी अवस्था स्वप्न है। निद्रा अवस्था में हम कभी-कभी स्वप्न देखते हैं। यह एक रहस्यम विषय है कुछ स्वस्त्र हमे भविष्य…

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योग

योग का अर्थ होता है जोड़ । योग की उत्पत्ति नक्षत्र से होती है। भूकेन्द्रीय दृष्टि से सूर्य + चन्द्रमा की गति का योग एक नक्षत्र भोगकाल 13 अंश 20 कला होता है तब एक योग की उत्पत्ति होती है। अर्थात सूर्य की दैनिक गति / अंश और चन्द्रमा की 13 अंश 20 कला है…

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नक्षत्र

चन्द्रमा जिस पथ पर पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करता है, तो उस समय मुख्य तारों के समूह के बीच मध्य से चन्द्रमा गुजरता है उसी समूह को नक्षत्र कहते हैं। चन्द्रमा का राशि चक्र नक्षत्रों में विभाजित है। पुराणों के अनुसार 27 नक्षत्र प्राचेतस दक्ष की सत्ताईस बेटियाँ हैं। जिनका विवाह चन्द्रमा से किया…

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