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नारायण बलि क्यों

शस्त्रघात से जिनकी मृत्यु हुई हो, मरण काल में अस्पृश्य व्यक्ति से जिनका स्पर्श हो गया हो और जिनकी मरण कालिक शास्त्रोक्त विधि पूर्ण न की जा सकी हो, उन व्यक्तियों का इस प्रकार का मरण 'दुर्मरण' कहा जाता है । नारायण बलि बिना किये जो कुछ जीव के उद्देश्य से श्राद्ध आदि प्रदान किया…

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दशगात्र

क्यों- गरुड पुराण के अनुसार स्थूल शरीर के नष्ट हो जाने पर यममार्ग में यात्रा के लिये आति वाहिक शरीर की प्राप्ति होती है । इस आतिवाहिक शरीर के दस अंगों का निर्माण दशगात्र के दस पिण्डों से होता है । जब तक दशगात्र के दस पिण्ड-दान नहीं होते, तब तक बिना शरीर प्राप्त किये…

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श्राद्ध में भक्तिभाव

देवकार्यादपि सदा पितृकार्य विशिष्यते । देवताभ्यो हि पूर्वं पितॄणामाप्यायनं वरम् ॥ (हेमाद्रि में वायु तथा ब्रह्मवैवर्त का वचन) देव कार्य की अपेक्षा पितृकार्य की विशेषता मानी गयी है । अतः देवकार्य से पूर्व पितरों को  तृप्त करना चाहिये । अपनी उन्नति चाहने वाला श्राद्ध में भक्तिभाव से पितरों को प्रसन्न करता है, उसे पितर भी सन्तुष्ट करते…

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